मोदी का उत्तराखंड प्लान तैयार! केदारनाथ पूजा के बाद टिहरी में जनसंवाद से बदलेंगे सियासी समीकरण
एक ओर बाबा केदार के दरबार से आध्यात्मिक ऊर्जा की बयार बहने वाली है, तो दूसरी ओर टिहरी की पहाड़ियों से देवभूमि की जनता से सीधे संवाद की तैयारी पूरी हो चुकी है। उत्तराखंड में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है और प्रदेश के राजनीतिक से लेकर प्रशासनिक गलियारों में एक ही नाम की चर्चा जोरों पर है—प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। सब कुछ तय शेड्यूल के मुताबिक रहा, तो इसी महीने प्रधानमंत्री एक बार फिर देवभूमि की पवित्र धरा पर कदम रखने जा रहे हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड आना सिर्फ एक सरकारी दौरा नहीं होता, बल्कि यह हर बार राज्य के पर्यटन, धर्म और विकास के लिए एक टर्निंग पॉइंट साबित होता है। इस बार के दौरे का खाका कुछ इस तरह खींचा जा रहा है कि प्रधानमंत्री केदारनाथ धाम पहुंचकर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना करेंगे और इसके बाद सीधे टिहरी पहुंचेंगे, जहां जनता के साथ उनका भव्य जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरे की सुगबुगाहट मात्र से ही भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं और स्थानीय जनता में जबरदस्त उत्साह की लहर दौड़ गई है।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर चौहान के मुताबिक, देश के इतिहास में नरेंद्र मोदी इकलौते ऐसे प्रधानमंत्री हैं, जिनका उत्तराखंड से एक अनूठा और गहरा भावनात्मक जुड़ाव रहा है। अपने कार्यकाल के दौरान वे देश के अन्य सभी प्रधानमंत्रियों की तुलना में सबसे ज्यादा बार देवभूमि पहुंचे हैं। इतिहास गवाह है कि जब-जब पीएम मोदी केदारनाथ के दर्शन करने आते हैं, उसके बाद चारधाम यात्रा में श्रद्धालुओं की आवक के सारे रिकॉर्ड टूट जाते हैं। उनकी हर यात्रा के साथ देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों की संख्या में अभूतपूर्व उछाल देखने को मिलता है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस बार पीएम मोदी के पिटारे में देवभूमि के लिए क्या नया छिपा है? परंपरा यही रही है कि प्रधानमंत्री जब भी उत्तराखंड की पावन धरती पर पैर रखते हैं, तो राज्य को अरबों रुपये की विकास योजनाओं का तोहफा देकर जाते हैं। ऐसे में इस बार के दौरे को लेकर भी उम्मीदें और कयास चरम पर हैं। क्या इस बार टिहरी से राज्य के बुनियादी ढांचे, कनेक्टिविटी या पर्यटन को लेकर कोई ऐतिहासिक घोषणा होने वाली है? इस सवाल का जवाब तो पीएम के आगमन के साथ ही मिलेगा, लेकिन इतना तय है कि देवभूमि एक बार फिर एक बड़े ऐतिहासिक पल की साक्षी बनने जा रही है।



