SIR विवाद में घिरे चुनाव आयोग के झुके कदम: वोटर लिस्ट से गायब हुए नामों पर मचा बवाल तो बैकफुट पर आया निर्वाचन आयोग, अब फिर से जुड़ेंगे छूटे हुए मतदाताओं के नाम
अज़हर मलिक
लोकतंत्र की बुनियाद कही जाने वाली निष्पक्ष चुनाव प्रणाली पर जब देश भर में सवाल उठने लगे, तो आखिरकार भारत निर्वाचन आयोग को अपने कड़े फैसलों से पीछे हटना ही पड़ा। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान जिस तरह से लाखों वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से अचानक गायब हो गए और प्रक्रिया को बेहद जटिल बना दिया गया था, उसने देश भर में एक बड़े नागरिक और राजनीतिक विवाद को जन्म दे दिया। चारों तरफ से घिरते निर्वाचन आयोग और जनता के तीखे आक्रोश के बीच अब आयोग पूरी तरह बैकफुट पर नजर आ रहा है। अपने फैसलों पर दोबारा विचार करते हुए आयोग ने यह बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है कि जिन पात्र नागरिकों के नाम इस दौरान सूची से छूट गए थे या काट दिए गए थे, उन्हें फिर से मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।
इस बड़े विवाद का मुख्य केंद्र बिंदु SIR प्रक्रिया के तहत Form 6 में किए गए वे सख्त और पेचीदा बदलाव थे, जिन्होंने आम नागरिकों के लिए मताधिकार पाना एक प्रशासनिक जंग जैसा बना दिया था। जब देश के कोने-कोने से यह आवाज उठी कि इस प्रक्रिया से पात्र वोटर भी अपने सबसे बड़े लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित हो रहे हैं, तब आयोग को अपनी गलती का अहसास हुआ। अब निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि SIR प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद छूटे हुए पात्र वोटरों और 18 साल की उम्र पार कर चुके नए युवाओं के नाम जोड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाएगा। इतना ही नहीं, Form 6 के विवादित और कड़े नियमों को हटाकर अब दोबारा से आसान और सामान्य प्रक्रिया को लागू कर दिया गया है। आयोग का यह कदम भले ही उसकी साख पर लगे सवालों को ढकने की कोशिश हो, लेकिन इसने एक बात साफ कर दी है कि जब बात जनता के संवैधानिक अधिकारों की आती है, तो बड़ी से बड़ी संवैधानिक संस्थाओं को भी जनभावनाओं और न्याय के सामने झुकना ही पड़ता है।



