मासूम मुस्कानों से लेकर गरीब की रसोई तक… जगमोहन सिंह बिष्ट ने गिनाईं मोदी सरकार की उपलब्धियां। 25 साल के सेवा संकल्प अभियान कि गूंज गांव की चौखट तक पहुंचा विकास का संदेश।
सलीम अहमद साहिल
आंगनवाड़ी केंद्र में मासूम चेहरों के बीच पहुंचा भाजपा नेतृत्व, कार्यकर्ती और सहायिका का सम्मान। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में कार्यक्रमों का सिलसिला जारी है। इसी कड़ी में रामनगर विधानसभा के मालधन चौड़ के मोहननगर स्थित आंगनवाड़ी केंद्र में भी सेवा, सम्मान और जनकल्याण का संदेश देखने को मिला।
आंगनवाड़ी केंद्र में जब नन्हे-नन्हे बच्चे पहुंचे तो उन्हें शायद इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि आज उनके बीच कुछ ऐसे मेहमान आने वाले हैं, जो उनके साथ खुशियां बांटने के साथ देश के भविष्य की तस्वीर भी उनके सामने रखेंगे। भाजपा उत्तराखंड प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य जगमोहन सिंह बिष्टऔर मालधन मंडल उपाध्यक्ष सुन्दर सिंह केंद्र पहुंचे। यहां आंगनवाड़ी कार्यकर्ती अनीता आर्य और उनकी सहायिका को सम्मानित किया गया।

इसके बाद बच्चों के बीच फ्रूटी, बिस्किट, नमकीन और टॉफियां बांटी गईं। नन्हे हाथों में आई टॉफियां और मासूम चेहरों पर खिली मुस्कान ने माहौल को भावुक कर दिया। ये वही बच्चे हैं, जिनकी आंखों में आज मासूमियत है, लेकिन आने वाले कल में इन्हीं आंखों में सपने होंगे और इन्हीं छोटे हाथों में देश का भविष्य।
इसी भाव के साथ जगमोहन सिंह बिष्ट ने ग्रामीणों और आंगनवाड़ी केंद्र में मौजूद लोगों के सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख भी किया।
जगमोहन सिंह बिष्ट प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य भाजपा उत्तराखंड कहना था कि सरकार की उपलब्धियों का असली अर्थ किसी कागज पर दर्ज आंकड़ा नहीं, बल्कि उस गरीब के चेहरे की राहत है जिसके घर राशन पहुंचता है, जिसे अपना पक्का घर मिलता है, उस मां की चिंता का कम होना है जिसे इलाज की सुरक्षा मिलती है और उस बच्चे का भविष्य है जिसे बेहतर जीवन का अवसर मिलता है।
जगमोहन सिंह बिष्ट ने ग्रामीण भारत की इसी तस्वीर को सामने रखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कि अनेको जन कल्याणकारी योजनाओ बारे मे विस्तार से बताते हुए का कि प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना जिसके तहत पात्र लाभार्थियों को निःशुल्क खाद्यान्न मिलता है। प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण ने ग्रामीण गरीब परिवारों के पक्के घर के सपने को सहारा दिया है। जल जीवन मिशन के जरिए गांवों के घरों तक नल से पेयजल पहुंचाने की दिशा में काम हुआ है, जबकि आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना गरीब और पात्र परिवारों को गंभीर बीमारी के इलाज में स्वास्थ्य सुरक्षा देती है।
किसान की बात आई तो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के जरिए पात्र किसानों को प्रत्यक्ष आय सहायता, फसल संकट के समय प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की सुरक्षा और महिलाओं के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के जरिए LPG कनेक्शन जैसी योजनाओं का उल्लेख सामने रख्खा।
गांव की तस्वीर केवल घर और सड़क से नहीं बदलती, बल्कि रोजगार, स्वच्छता, पानी और महिलाओं की आर्थिक भागीदारी से भी बदलती है। इसी क्रम में स्वच्छ भारत मिशन-ग्रामीण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन*जैसी योजनाओं को ग्रामीण जीवन में बदलाव से जोड़ा गया।
जगमोहन सिंह बिष्ट ने ग्रामीण रोजगार के लिए विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 (VB-G RAM G) का भी उल्लेख किया और इसे ग्रामीण परिवारों के लिए मजदूरी रोजगार की गारंटी से जोड़कर बताया।
लेकिन इस पूरे कार्यक्रम का सबसे भावुक पक्ष योजनाओं की सूची के साथ वे मासूम बच्चे थे, जिनके बीच बैठकर विकास की असली तस्वीर को महसूस किया गया। क्योंकि किसी भी सरकार की सबसे बड़ी जिम्मेदारी सिर्फ आज की जरूरत पूरी करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी का भविष्य सुरक्षित करना होती है।
जगमोहन सिंह बिष्ट ने इसी संदेश को रेखांकित करते हुए कहा कि आज इन बच्चों के हाथों में टॉफियां हैं, लेकिन कल इन्हीं हाथों में किताबें होंगी, हुनर होगा और देश की जिम्मेदारी होगी। गांव का बच्चा अगर अच्छे स्वास्थ्य, शिक्षा, पोषण और सुरक्षित भविष्य के सपने देख सकता है, तो यही विकास की सबसे बड़ी तस्वीर है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष केवल सत्ता और राजनीति की यात्रा नहीं, बल्कि सेवा, संगठन और जनकल्याण को केंद्र में रखकर आगे बढ़ने के सेवा संकल्प अभियान कि यात्रा है। इस यात्रा का मूल्यांकन उस अंतिम व्यक्ति की जिंदगी में आए बदलाव से होना चाहिए, जो आज भी गांव की पगडंडी पर खड़ा होकर विकास की राह देखता है। उस अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक विकाश को पहुंचना ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना है
मोहननगर के आंगनवाड़ी केंद्र में आयोजित यह कार्यक्रम इसी संदेश के साथ समाप्त हुआ कि देश का भविष्य सिर्फ बड़े शहरों की इमारतों में नहीं, बल्कि गांवों के इन छोटे-छोटे आंगनवाड़ी केंद्रों में भी आकार ले रहा है। आज की ये मासूम मुस्कानें ही कल के भारत की सबसे बड़ी तस्वीर हैं।



