भारतीय सिनेमा के बेबाक सितारे नाना पाटेकर का निधन: अभिनय जगत ने खोया अपना अनमोल रत्न
भारतीय सिनेमा में अपनी कड़क आवाज़, बेमिसाल अभिनय और संवाद अदायगी के अनूठे अंदाज़ से दशकों तक दर्शकों पर राज करने वाले अभिनेता नाना पाटेकर का दुखद निधन हो गया है। उनके निधन की खबर से पूरा बॉलीवुड, क्षेत्रीय सिनेमा और उनके करोड़ों प्रशंसकों में गहरा शोक छा गया है। ‘क्रांतिवीर’, ‘परिंदा’, ‘तिरंगा’ और ‘अग्निसाक्षी’ जैसी फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाने वाले नाना पाटेकर सिर्फ एक अभिनेता नहीं, बल्कि एक विचार थे। उन्होंने फिल्मों में नायक और खलनायक दोनों ही भूमिकाओं को एक नई ऊँचाई दी। उनके चले जाने से कला और अभिनय का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हो गया है।
अभिनय की दुनिया से इतर नाना पाटेकर अपने जमीनी स्वभाव और समाजसेवा के लिए हमेशा याद किए जाएँगे। उन्होंने अपनी संस्था ‘नाम फाउंडेशन’ के ज़रिए महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों और किसानों की मदद में अहम योगदान दिया था। वह हमेशा बेबाकी से सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखते थे और सादगी भरा जीवन जीने में विश्वास करते थे। फिल्म जगत की दिग्गज हस्तियों, राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की है। उनका जाना भारतीय फिल्म इतिहास की ऐसी क्षति है जिसकी भरपाई संभव नहीं है, लेकिन उनकी कला और उनके विचार हमेशा अमर रहेंगे।



