अभिनय के पुरोधा नाना पाटेकर का निधन: सिनेमाई कैनवास पर छोड़ गए ‘क्रांतिवीर’ की अमिट छाप
भारतीय सिनेमा को अपने अनोखे अंदाज़ और संजीदा अभिनय से समृद्ध करने वाले महान अभिनेता नाना पाटेकर (75) का कार्डियक अरेस्ट के कारण निधन हो गया है। लगभग चार दशकों के लंबे करियर में उन्होंने हिंदी और मराठी सिनेमा को कई कालजयी फिल्में दीं। साल 1989 में आई फिल्म ‘परिंदा’ में ‘अन्ना सेठ’ के उनके खौफनाक किरदार ने उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाया, तो वहीं 1994 में आई ‘क्रांतिवीर’ में ‘प्रताप तिलक’ के रूप में उनके धमाकेदार भाषण और संवाद-अदायगी ने उन्हें हमेशा के लिए अमर बना दिया। ‘तिरंगा’ में ब्रिगेडियर सूर्यदेव सिंह के साथ उनकी जोड़ी और ‘अग्नि साक्षी’, ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ तथा ‘अपहरण’ जैसी फिल्मों में उनकी संजीदा अदाकारी आज भी अभिनय के छात्रों के लिए एक मिसाल है। सिर्फ गंभीर भूमिकाएँ ही नहीं, बल्कि ‘वेलकम’ फिल्म में ‘उदय भाई’ के कॉमिक किरदार से भी उन्होंने साबित कर दिया कि वह हर तरह के रोल में महारत रखते हैं।
सिनेमा के पर्दे से दूर, नाना पाटेकर एक सच्चे जनसेवक और जमीन से जुड़े इंसान के रूप में भी हमेशा याद रखे जाएँगे। उन्होंने अपनी संस्था ‘नाम फाउंडेशन’ के ज़रिए महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त किसानों और उनके परिवारों को आर्थिक व सामाजिक संबल प्रदान किया। जीवन के हर मोड़ पर अपनी शर्तों और सादगी से जीने वाले इस महान कलाकार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जा रही है। प्रधानमंत्री, फिल्म जगत के दिग्गजों और लाखों प्रशंसकों ने उन्हें अश्रुपूरित श्रद्धांजलि अर्पित की है। भले ही नाना पाटेकर हमारे बीच से चले गए हों, लेकिन ‘क्रांतिवीर’ और ‘परिंदा’ जैसी फिल्मों में उनका बेमिसाल अभिनय और समाज के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा।



