सिनेमाई कैनवास का वो सितारा जो अभिनय को नया जीवन दे गया: नाना पाटेकर के जाने से कला जगत में छाया सन्नाटा
अपनी कड़क आवाज़, तीखी आँखों और संजीदा संवाद अदायगी से पर्दे पर अलग ही हलचल पैदा कर देने वाले महान अभिनेता नाना पाटेकर (75) अब हमारे बीच नहीं रहे। दिल का दौरा पड़ने के कारण उनका निधन हो गया, जिसकी खबर आते ही पूरे भारतीय सिनेमा और उनके प्रशंसकों में गहरा शोक छा गया। चार दशकों से भी लंबे अपने फिल्मी सफर में नाना जी ने हर उस किरदार को अमर बना दिया, जिसे उन्होंने छुआ। ‘परिंदा’ में अन्ना सेठ का खौफ हो या ‘क्रांतिवीर’ में समाज को झकझोर देने वाले प्रताप तिलक के तेवर, उनकी अभिनय क्षमता का कोई सानी नहीं था। ‘तिरंगा’, ‘अग्निसाक्षी’ और ‘वेलकम’ जैसी अनगिनत फिल्मों के माध्यम से उन्होंने साबित किया कि एक सच्चा कलाकार हर वर्ग के दर्शक के दिल में अपनी जगह बना सकता है।
पर्दे की चमक-धमक से दूर, नाना पाटेकर वास्तविक जीवन में भी एक अलग ही मिट्टी के बने इंसान थे। उन्होंने कभी भी सादगी और अपनी जड़ों को नहीं छोड़ा। महाराष्ट्र के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में किसानों के आँसू पोंछने के लिए बनाई गई उनकी संस्था ‘नाम फाउंडेशन’ उनके सामाजिक दायित्व और उदार दिल की जीती-जागती मिसाल है। वह सिर्फ एक पर्दे के नायक नहीं थे, बल्कि असल जिंदगी में भी हज़ारों परिवारों के लिए सहारा बने। उनके जाने से जो खालीपन आया है, उसे भर पाना मुमकिन नहीं है। लेकिन उनकी फिल्में, उनके बेबाक विचार और समाज के प्रति उनका निस्वार्थ समर्पण आने वाले कई दशकों तक कला प्रेमियों और समाज को नई दिशा दिखाता रहेगा।



