‘नटसम्राट’ से लेकर ‘अपहरण’ तक: नाना पाटेकर के वो ऐतिहासिक किरदार जो भारतीय सिनेमा में हमेशा अमर रहेंगे
नाना पाटेकर की फ़िल्मी यात्रा सिर्फ़ बॉक्स ऑफिस की सफलता तक सीमित नहीं थी, बल्कि उन्होंने अपने किरदारों के माध्यम से भारतीय सिनेमा की दिशा बदलने का काम किया। मराठी फ़िल्म ‘नटसम्राट’ (2016) में एक सेवानिवृत्त रंगमंच अभिनेता के रूप में उनका अभिनय इतना मर्मस्पर्शी था कि देखने वाले हर दर्शक की आँखें नम हो गई थीं। वहीं प्रकाश झा की फ़िल्म ‘अपहरण’ में एक चतुर और संजीदा नेता ‘ताबरेज़ आलम’ के रोल में उन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा का एक और अलग रूप पेश किया। इसके अलावा ‘वजूद’, ‘शक्ति: द पावर’ और ‘अग्नि साक्षी’ जैसी फ़िल्मों में जुनून और सनक को पर्दे पर उतारने में उनका कोई मुकाबला नहीं था।
फ़िल्म समीक्षकों और सिनेमा प्रेमियों का मानना है कि नाना पाटेकर एक ऐसे अभिनेता थे, जो बिना एक शब्द बोले सिर्फ़ अपनी आँखों और चेहरे के हाव-भाव से पूरा माहौल बदल देते थे। व्यावसायिक मसाला फ़िल्मों से लेकर कलात्मक सिनेमा तक, उन्होंने हर तरह की कहानी को अपनी सशक्त शैली से समृद्ध किया। उनके जाने के बाद भी ‘परिंदा’, ‘क्रांतिवीर’, ‘नटसम्राट’ और ‘वेलकम’ जैसी फ़िल्में हमेशा इस बात की गवाही देती रहेंगी कि भारतीय फ़िल्म जगत के पास नाना पाटेकर जैसा दूसरा कोई कलाकार न कभी था और न कभी होगा
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