कला के साथ समाज सेवा की मिसाल: ‘नाम फाउंडेशन’ के जरिए हजारों किसानों की उम्मीद बने थे नाना पाटेकर
भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर (75) के निधन के बाद न केवल फिल्मी दुनिया, बल्कि ग्रामीण भारत और किसान समाज भी गहरे शोक में है। बड़े पर्दे पर अपनी दमदार अदायगी के लिए पहचाने जाने वाले नाना पाटेकर ने वास्तविक जीवन में भी समाज सेवा की एक अनूठी मिसाल कायम की थी। वर्ष 2015 में महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्रों में किसानों की स्थिति से व्यथित होकर उन्होंने अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर ‘नाम फाउंडेशन’ की स्थापना की थी। इस संस्था के माध्यम से उन्होंने महाराष्ट्र के हजारों पीड़ित किसान परिवारों को आर्थिक सहायता पहुँचाने, जल संरक्षण के लिए नदियां व नाले गहरा करने और गांवों में रोज़गार के साधन उपलब्ध कराने में ऐतिहासिक योगदान दिया था।
उनकी संस्था ने आत्महत्या कर चुके किसानों के परिवारों को न सिर्फ संबल दिया, बल्कि उनके बच्चों की शिक्षा और पुनर्वास की भी जिम्मेदारी उठाई। अपनी कुल कमाई का एक बड़ा हिस्सा समाज हित में समर्पित करने वाले नाना पाटेकर हमेशा ग्लैमर की चकाचौंध से दूर सादगी भरा जीवन जीने में विश्वास रखते थे। उनके निधन पर कई किसान संगठनों और ग्रामीण समुदायों ने भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि देश ने न केवल एक महान कलाकार, बल्कि गरीबों और वंचितों का मसीहा भी खो दिया है। उनकी सामाजिक चेतना और जनसेवा का यह जज्बा हमेशा देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा।



