रामनगर के कानिया में खामोश हुआ एक घर: नशे के अँधेरे ने ली 42 साल के पवन की जिंदगी, गले पर फंदे के निशान छोड़ बंद हुई सांसें
सलीम अहमद साहिल
रामनगर: जब सुबह की पहली किरण के साथ लोग एक नए दिन की शुरुआत कर रहे थे, ठीक उसी वक्त कानिया के गंगोत्री विहार की गली नंबर 3 में सन्नाटा एक खौफनाक सच बयां कर रहा था। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि बंद कमरे के भीतर एक सांस हमेशा-हमेशा के लिए थम चुकी है। 10 अक्टूबर 2026 की अलसुबह करीब 6:00 बजे जब डायल 112 का हूटर गंगोत्री विहार की तंग गलियों में गूंजा, तो अनहोनी की आशंका से आसपास के लोग सिहर उठे। सूचना मिलते ही पुलिस टीम जब मौके पर पहुंची और कमरे का दरवाजा खोला, तो सामने का मंजर बेहद दर्दनाक था—बेड पर 42 वर्षीय पवन कुमार शर्मा पुत्र गिरीश चंद्र शर्मा का बेजान शरीर पड़ा हुआ था।
गले पर पड़े गहरे लाल रंग के फंदे के निशान इस बात की चीख-चीखकर गवाही दे रहे थे कि जिंदगी और मौत की इस जंग में खामोशी जीत चुकी है। रोते-बिलखते परिजनों ने कांपती आवाज़ में पुलिस को बताया कि पवन ने रस्सी के सहारे फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली है। शुरुआती जांच और स्थानीय स्तर पर जुटाई गई जानकारियों में एक ऐसा कड़वा सच सामने आया, जिसने इस पूरी त्रासदी की पटकथा लिखी थी। पता चला कि मृतक पवन लंबे समय से नशे के जानलेवा दलदल में धंसा हुआ था और किसी तरह का कामकाज नहीं करता था। नशे की यही लत और काम न करने की लाचारी धीरे-धीरे उसकी जिंदगी को निगलती चली गई और आखिरकार शनिवार की भोर में उसने यह खौफनाक आत्मघाती कदम उठा लिया। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर अग्रिम पंचायतनामे की वैधानिक प्रक्रिया शुरू कर दी है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि नशा सिर्फ एक इंसान को ही खत्म नहीं करता, बल्कि पूरे परिवार की खुशियों को चिता पर चढ़ा देता है।



