प्रशासन के बुलडोजर ने तोड़ी अतिक्रमण की दीवारे, पूछड़ी में 81 अवैध स्ट्रक्चर ध्वस्त; भारी पुलिस बल की मौजूदगी में चला अभियान।
सलीम अहमद साहिल
रामनगर के पूछड़ी में कल तक जिस बस्ती में जिंदगी की रौनक थी, जहां गरीब परिवारों के आशियानों में बच्चों की किलकारियां गूंजती थीं और लोग अपने घरों की छत के नीचे सुकून की नींद सोते थे, आज वहां सिर्फ उजड़े आशियानों का मंजर और खामोशी पसरी हुई है। सुबह प्रशासन के बुलडोजर ने ऐसी तबाही मचाई कि देखते ही देखते वर्षों की मेहनत, खून-पसीने की कमाई और हजारों सपनों से खड़े किए गए घर मिट्टी के ढेर में तब्दील हो गए। अपने बच्चों के सिर पर छत का साया बनाए रखने के लिए जिंदगीभर की जमा-पूंजी लगाने वाले परिवार आज खुले आसमान के नीचे खड़े हैं। इस उजड़ती बस्ती में एक घर ऐसा भी था, जहां 5 नवंबर को बेटी की बारात आनी थी, जिस आंगन में शहनाइयां गूंजने और खुशियों के जश्न की तैयारियां होनी थीं, आज उसी घर में बुलडोजर की कार्रवाई के बाद मातम जैसा सन्नाटा पसरा है। जिस घर में बेटी की विदाई के सपने संजोए जा रहे थे, वहां अब उजड़ी दीवारों और बिखरे सामान के बीच परिवार के आंसू इस कार्रवाई की सबसे दर्दनाक तस्वीर बयां कर रहे हैं।
सरकार और प्रशासन की नजर में सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की यह कार्रवाई भले ही कानून के अनुपालन का हिस्सा हो, लेकिन मानवीय संवेदनाओं के आईने में उजड़े परिवारों का दर्द कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ पुनीत तोमर के मुताबिक, राष्ट्रीय एकता दिवस पर मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में प्रशासन, पुलिस और वन विभाग ने संयुक्त अभियान चलाकर भारतीय वन अधिनियम (Indian Forest Act) की निर्धारित प्रक्रिया के तहत 81 अवैध स्ट्रक्चर ध्वस्त किए। विभाग का कहना है कि कार्रवाई में केवल उन्हीं संरचनाओं को शामिल किया गया, जिन पर वन अधिनियम के तहत कोई दावा लंबित नहीं था और न्यायालय से स्थगन आदेश भी प्राप्त नहीं था। इस व्यापक अभियान में करीब 850 पुलिसकर्मियों और 250 वनकर्मियों के साथ तराई, कॉर्बेट और रामनगर डिवीजन के कर्मचारियों तथा भारी मशीनरी को तैनात किया गया। डीएफओ के अनुसार, पहले चरण में 51 स्ट्रक्चर हटाए गए थे, जबकि दूसरे चरण में 81 संरचनाओं को पूरी तरह ध्वस्त कर कार्रवाई पूरी की गई है।
वन विभाग और पुलिस-प्रशासन की इस संयुक्त कार्रवाई ने न सिर्फ पूछड़ी की बस्ती का नक्शा बदल दिया, बल्कि सरकारी भूमि पर बसे दूसरे परिवारों के दिलों में भी बेदखली का खौफ गहरा कर दिया है। जिन परिवारों ने वर्षों तक अपने आशियानों को सींचा, आज उनके सामने सबसे बड़ा सवाल सिर छिपाने की जगह और अपने बच्चों के भविष्य का है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि अतिक्रमण हटाने का अभियान आगे भी जारी रहेगा और प्रक्रिया पूरी होने के साथ उपलब्ध संसाधनों के आधार पर अन्य क्षेत्रों में भी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में रामनगर के उन इलाकों में रहने वाले परिवारों की धड़कनें तेज हैं, जहां सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के मामले सामने आते रहे हैं। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन का अगला बुलडोजर किस इलाके की ओर बढ़ेगा और इस कार्रवाई की जद में अगली बस्ती कौन सी होगी।