गज़ब हो गया! उत्तराखंड में BLO मैडम ने ‘जिंदा’ युवक को ही कागजों में मार डाला, अब खुद को ‘जिंदा’ साबित करने दर-दर भटक रहा ‘साहिल’
अज़हर मलिक
उत्तराखंड में इन दिनों वोटर लिस्ट को अपडेट करने और सर्वे (SIR) का काम ज़ोरों-शोरों पर चल रहा है। प्रदेश सरकार और जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी दिन-रात आदेश जारी कर रहे हैं कि बीएलओ (BLO) घर-घर जाएं, डोर-टू-डोर सर्वे करें, बारीकी से जांच करें और एक-एक नागरिक को समझाकर सही फार्म भरवाएं। अधिकारियों के इन कड़े निर्देशों का बीएलओ मैडम ने ऐसा पालन किया कि सीधे ‘यमराज’ को ही चुनौती दे डाली! मामला काशीपुर के , बरखेड़ा पांडे का है, जहाँ बीएलओ कुमकुम मैडम की ‘दिव्य दृष्टि’ ने एक भले-चंगे और चलते-फिरते इंसान को कागजों में ही मौत के घाट उतार दिया।
पूरा माजरा सुनेंगे तो आप भी सोच में पड़ जाएंगे कि हंसे या सिर पीटें! दरअसल, बरखेड़ा पांडे निवासी अब्दुल रशीद के 23 वर्षीय बेटे साहिल (जन्म तिथि: 10/04/2001) को सरकारी वोटर लिस्ट के Enumeration Form में आधिकारिक रूप से “Death” (मृत) घोषित कर दिया गया है। जब इस बात की भनक ‘मृतक’ साहिल को लगी, तो उसके अपने ही होश उड़ गए। साहिल ने खुद को टटोला, देखा कि सांसें तो चल ही रही हैं, फिर भागा-भागा अपना फॉर्म और आधार कार्ड लेकर बीएलओ कुमकुम मैडम के पास पहुंचा। साहिल ने बड़े ही विनम्र भाव से कहा— “मैडम जी, ज़रा गौर से देखिए… मैं भूत नहीं हूँ, साक्षात आपके सामने ज़िंदा खड़ा हूँ! कागजों में मेरी मौत का फरमान वापस ले लीजिए।”
लेकिन धन्य है हमारी प्रशासनिक कार्यप्रणाली! बीएलओ मैडम के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। अब आलम यह है कि जो युवक अपने इलाके में सीना तानकर घूमता था, वह आज सरकारी कागजों में ‘जिंदा’ साबित होने के लिए दफ्तरों और अधिकारियों के चक्कर काटने और चौखटों पर ठोकरें खाने को मजबूर है। एक तरफ सरकार शत-प्रतिशत सटीक सर्वे के बड़े-बड़े दावे कर रही है, तो दूसरी तरफ कुमकुम मैडम जैसी बीएलओ अधिकारियों के सारे आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए एक ज़िंदा इंसान के वोट देने के लोकतांत्रिक अधिकार की बलि चढ़ा रही हैं।
अब देखना यह दिलचस्प होगा कि कागजों में ‘परलोक सिद्ध’ हो चुके साहिल को यह सुस्त तंत्र कब तक पुनर्जन्म देता है या फिर साहब लोग यूं ही कुंभकर्णी नींद सोते रहेंगे!



