दहेज के झूठे आरोपों का दंश झेलते-झेलते दुनिया से रुखसत हुआ बेगुनाह पति, 14 साल बाद आई कोर्ट के न्याय की खबर
अज़हर मलिक
दहेज उत्पीड़न और मारपीट के एक दर्दनाक और लंबे चले मामले में काशीपुर के प्रख्यात वरिष्ठ अधिवक्ता संजीव कुमार आकाश की धारदार दलीलों के बल पर अदालत ने भले ही बुजुर्ग सास शांति कौर को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया, लेकिन इस इंसाफ की कीमत एक परिवार को अपना बेटा खोकर चुकानी पड़ी। वादिनी द्वारा लगाए गए गंभीर व मनघड़ंत आरोपों के कारण पिछले 14 वर्षों से अदालत के चक्कर काटते-काटते बेगुनाह पति जसवंत सिंह जिंदगी की जंग हार गया और मुकदमे के दौरान ही इस दुनिया से अलविदा हो गया। अधिवक्ता संजीव कुमार आकाश ने जिस गहन अध्ययन और अकाट्य तर्कों के साथ अदालत में सच का पक्ष रखा, उसी के बल पर न्यायिक मजिस्ट्रेट आयशा फरहीन की अदालत ने दिवंगत पति की वृद्ध मां शांति कौर को पूर्णतः बरी कर दिया।
अदालत में पैरवी के दौरान अधिवक्ता संजीव कुमार आकाश ने अभियोजन पक्ष के दावों की बखिया उधेड़ते हुए यह साबित किया कि घटना के चार महीने बाद बिना किसी जायज कारण के फर्जी प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी, जिसका मकसद केवल परिवार को मानसिक और शारीरिक रूप से तोड़ना था। इसके साथ ही उन्होंने अदालत के समक्ष यह भी कड़ा तर्क रखा कि कथित मारपीट की कोई भी मेडिकल रिपोर्ट फाइल में मौजूद नहीं थी और पेश किए गए गवाह भी केवल सुनी-सुनाई बातों के आधार पर बयान दे रहे थे। यद्यपि 14 साल के लंबे और दर्दभरे इंतजार के बाद कानूनी लड़ाई में सच्चाई की जीत हुई, मगर न्याय की यह घड़ी उस बेकसूर पति के लिए बहुत देर से आई, जो खुद को बेगुनाह साबित करने की कसक दिल में लिए दुनिया से चला गया। इस भावुक कर देने वाले फैसले और अधिवक्ता के अतुलनीय विधिक कौशल की पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है
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