महादेव नहर की सफाई में उतरी जनता, सिंचाई विभाग के सुस्त तंत्र पर भारी पड़ी महापौर दीपक बाली की पहल
अज़हर मलिक
अपार आस्था की प्रतीक महादेव नहर, जो सिंचाई विभाग की वर्षों की घोर अनदेखी और विभागीय सुस्ती के कारण प्लास्टिक और गंदगी का डंपिंग जोन बन चुकी थी, उसे स्वच्छ और पुनर्जीवित करने के लिए महापौर दीपक बाली ने अभूतपूर्व मोर्चा संभाला। जिस विभाग के पास करोड़ों का बजट, भारी-भरकम अमला और नहरों के रखरखाव का संवैधानिक जिम्मा था, वह अफसरशाही की नींद सोता रहा, लेकिन जब जनता की तकलीफ और आगामी छठ पर्व को लेकर आस्था का सवाल उठा, तो नगर निगम बोर्ड और शहरवासी खुद अपनी विरासत को बचाने सड़क पर आ गए। सुबह आठ बजे शुरू हुए इस सफाई संग्राम में महापौर दीपक बाली अपने पूरे परिवार—पत्नी श्रीमती उर्वशी दत्त बाली और बेटी मुद्रा बाली के साथ जब नहर के कीचड़ में उतरे, तो देखते ही देखते यह अभियान एक जनक्रांति में बदल गया। पॉलिटेक्निक, गोविंद बल्लभ पंत, समर स्टडी हॉल, गुरुकुल फाउंडेशन और एक ओंकार ग्लोबल स्कूल के मासूम बच्चों से लेकर 17-19 साल के युवाओं, बेटियों, शिक्षकों, जनप्रतिनिधियों, व्यापारिक व सामाजिक संगठनों और भाजपा पदाधिकारियों सहित हजारों हाथों ने एक साथ नहर से कचरा बाहर फेंकना शुरू किया, जिससे कुछ ही घंटों में गंदा पानी निर्मल धारा में तब्दील हो गया।
सफाई के बीच महापौर ने जब 7-8 साल के नौनिहालों को पूरी लगन से कचरा उठाते देखा तो भावुक होकर कहा कि काशीपुर में स्वच्छता की एक नई अलख जग चुकी है और ये युवा ही कल की स्वच्छता क्रांति के असली वाहक बनेंगे। उन्होंने मौके पर ही श्रमदान करने वाले विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया। महापौर ने स्पष्ट किया कि नदियां और नहरें भारतीय संस्कृति में मां का दर्जा रखती हैं और इनका संरक्षण केवल सरकारी एजेंसियों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता, खासकर तब जब संबंधित विभाग अपनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह पल्ला झाड़ चुके हों। विशेष रूप से छठ पूजा स्थल वाले हिस्से की मुस्तैदी से की गई सफाई ने स्थानीय पूर्वांचल समाज और क्षेत्रीय नागरिकों के दिलों को छू लिया।
इस महाअभियान में राज्य मंत्री मनजीत सिंह राजू, सहायक नगर आयुक्त शालिनी नेगी, कार्यालय अधीक्षक विकास शर्मा, पार्षद अनिल कुमार, सीमा सागर, सतीश कुमार, पूर्व पार्षद देव प्रजापति, वैशाली गुप्ता, अनीता कांबोज, प्रिंस बाली, रवि प्रजापति, आलोक तिवारी, अंतरप्रीत सिंह चीमा, डीपी सिंह, डीएन यादव, पूर्वांचल छठ पूजा समिति के मनोज राय, आनंद कुमार, हिंदू वाहिनी के आनंद तिवारी और गोविन्द बल्लभ पंत स्कूल के प्रधानाचार्य अजय शंकर कौशिक समेत नगर के हजारों गणमान्य लोगों ने पसीना बहाया।
महादेव नहर का यह बदलता स्वरूप जहां एक तरफ जनभागीदारी की ताकत बयां कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ शहर के गलियारों में यह तीखा सवाल भी छोड़ गया है कि जब सीमित संसाधनों में महापौर और आम जनता मिलकर किसी नहर की तस्वीर बदल सकते हैं, तो फिर सरकारी खजाने से मोटी तनख्वाह डकारने वाला सिंचाई विभाग आखिर किस बात का इंतजार कर रहा था और क्या शासन इन बेपरवाह अफसरों पर कोई सख्त कार्रवाई करेगा या फिर हर बार जनहित के कामों के लिए जनता को ही बदबूदार नहरों में उतरना पड़ेगा।




