डिप्लोमेसी की बिसात पर जब दुनिया अपनी चालें बदल रही है, तब ग्रामीण अंचल की एक शांत चौखट पर भारत के वैश्विक रुतबे का वह खाका खिंचा, जिसने युवा दिमागों में जिज्ञासा का नया तूफान खड़ा कर दिया।
राजकीय महाविद्यालय मालधनचौड़ के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा आयोजित एकदिवसीय संगोष्ठी में जब जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के अंतर्राष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ (से.नि.) प्रोफेसर स्वर्ण सिंह मंच पर पहुंचे, तो विषय था—’बदलती विश्व व्यवस्था में भारत की विदेश नीति का प्रभाव’। उन्होंने आंकड़ों और वर्तमान वैश्विक परिदृश्यों की कसौटी पर कसते हुए यह साबित किया कि कैसे भारत आज की अस्थिर कूटनीति में एक मजबूत धुरी बनकर उभरा है। उनका व्याख्यान महज़ एक भाषण नहीं, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय संबंधों की एक जीवंत पाठशाला बन गया, जहां विद्यार्थियों ने विचार-उत्तेजक सवाल पूछकर कूटनीति के गहरे पहलुओं को समझा और प्रोफेसर सिंह ने भी बेहद सादगी से उनकी हर शंका को शांत किया।

कार्यक्रम की शुरुआत में प्रोफेसर (डॉ.) अनुपमा तिवारी ने पुष्पगुच्छ भेंट कर मुख्य अतिथि का अभिनंदन किया, जबकि राजनीति विज्ञान विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर प्रियदर्शन के कुशल संयोजन ने पूरे कार्यक्रम को एक वैचारिक प्रवाह दिया। संगोष्ठी के समापन पर प्रोफेसर जी. सी. पंत ने आभार जताते हुए कहा कि ग्रामीण पृष्ठभूमि के इस महाविद्यालय में ऐसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ का आगमन विद्यार्थियों और पूरे संस्थान के लिए ज्ञान का एक अनमोल अवसर साबित हुआ है।
अंत में महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. सुशीला सूद ने प्रोफेसर स्वर्ण सिंह को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका धन्यवाद ज्ञापित किया। इस वैचारिक मंथन में डॉ. पी.के. निश्चल, प्रदीप चंद्र, दीपा पांडे और नवनिर्वाचित छात्र संघ पदाधिकारियों समेत बड़ी संख्या में शिक्षक, कर्मचारी और छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।



